मामृतात्

मामृतात्

 

महामृत्युन्जय मंत्र से लिया गया है,

जिसका अर्थ है सुपूर्ण अमरत्व।

जब हम अपनी तीसरी आंख पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो दो आँखों के पीछे है, यह हमें आपको महसूस करने की ताकत देती है और इसके द्वारा हम जीवन में खुश, संतुष्ट और शांति महसूस करते हैं| यह मंत्र ऋग्वेद (मंडल 7, हिम 59) में पाया जाता है| यह मंत्र ऋषि वशिष्ठ को समर्पित है जो उर्वसी और मित्रवरुण के पुत्र थे| भगवान शिव को कालांतक कहा जाता है| इस मंत्र को केवल ऋषि मार्कंडेय को ज्ञात गुप्त मंत्र माना जाता है| इस मंत्र के जाप से आत्मा के कर्म शुद्ध हो जाते हैं और आयु और यश की प्राप्ति होती है| साथ ही यह मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है| महामृत्युंजय मंत्र चमत्कारी एवं शक्तिशाली मंत्र है| जीवन की अनेक समस्याओं को सुलझाने में यह सहायक है| मनुष्य जीवन की सफलता के लिए इसके तीन प्रमुख भाग मानकर इस सिद्धान्त को आधुनिक संदर्भ में प्रतिपादित करने का प्रयास है, ये तीन भाग इस प्रकार है –

योग

योग = य + ओ + ग + अ = Y + o + g + a = Yoga

Yoga (Sanskrit: योग) is a Sanskrit word derived from the verb root called ‘yuj’ (युज्) “to attach, join, harness, yoke”. In the context of yoga sutras, the word Yoga means union of the individual consciousness with the universal consciousness. Word ‘Yoga’ is a Romanization of the word ‘Yog’ and is pronounced as ‘Yog’ only. Alphabet ‘a’ is added at the end for the reader to know that the ‘g’ sound at the end of the word is complete and not a half sound. The practice of yoga which can be perceived as a group of physical, mental, and spiritual practices has been thought to date back to pre-Vedic Indian traditions; possibly in the Indus valley civilization around 3000 BCE.

 

मनःशान्ति

संवाद